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Best New Mohabbat Shayari – मुहब्बत शायरी हिंदी में 2020

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Mohabbat Shayari

Best New Mohabbat Shayari – मुहब्बत शायरी हिंदी में

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जुनून हद से गुज़र जाये तो दीवाना होता है ।
दीवानगी हद से गुज़र जाये तो बेगाना होता है 

 

इश्क़ आंखों से छलक जाये तो पैमाना होता है 
इश्क़ जब इश्क़ मे जल जाये तो परवाना होता है 

 

जो लोग कहते हैं की प्यार वक़्त के साथ कम हो जाता है
कृपा कर के एक बार ये तसवीर देख लो

 

गर मालूम जो होता हमें अंजाम-ए-मोहब्बत
तो लेते ना कभी भूल के भी हम नाम-ए-मोहब्बत !!!!

 

क्यूं करते हो इंतज़ार उनके जवाब का
जवाब ना आना भी तो एक जवाब ही है

 

काश देखो कभी टूटे हुए आईनों को …
दिल शिकस्ता हो तो फिर अपना पराया क्या है …

 

अपनी जुबां तो बंद है तुम ख़ुद ही सोच लो ..
पड़ता नहीं है यूं ही सितम-गऱ किसी का नाम ..

 

लुटा के दिल की जागीर फिर सम्हाल कर लाये है
फिर कोई आये फिर दिल टूटे तो कोई बात बने ..

 

यादों की अक्सर उधेड़बुन तो होती है ….
पर रफू और मरम्मत कभी नहीं….!!

 

आते ही सीने से लगाया था मुझे.
ना जाने किस से लड़ के आया था

 

सीने मे अपने हम सब कुछ दफना चुके है,

और लोग यह समझते है के हम तुझको भूला बैठे है.

 

वो थक गई थी भीड़ में चलते हुए
उसके बदन पे बहुत सी निगाहों का बोझ था…!!

 

जानिए उस से निभेगी किस तरह
वो ख़ुदा है मैं तो बंदा भी नहीं ..

 

Mohabbat Shayari

 

उनकी हसरत है,, जिसे दिल से मिटा भी न सके…

ढूंढने उसी को चली है जिसे कभी पा न सके…

 

आज का दिन बड़ा ख़ास है,
आपके आने की आस है
थोड़ी भूख थोड़ी प्यास है,
आप नहीं बस आपका अहसास है.

 

याद उसे इंतिहाई करते हैं
सो हम उस की बुराई करते हैं

 

यूँ तसल्ली दे रहे हैं हम दिल-ए-बीमार को,

जिस तरह थामे कोई गिरती हुई दीवार को।

 

बहुत अंदर तक तबाही मचाता है ।
वो आँसू जो आँख से बह नही पाता

 

फिर पलट कर निगाह नहीं आयी
तुम पे कुर्बान हो गई होगी

 

लिबास वहां कम पड़ जाते है,

नज़रें जहां गन्दी हो।

 

बिछड़ जाने का डर था , वो अभी बिछड़ा नहीं था
सरों पे रात आ पहुंची थी दिन अभी गुज़रा नहीं था

 

मुझे मालूम है तुमने बहुत बरसात देखी हैं ,
मग़र मेरी इन आँखों से सावन हार जाता है…..!!

 

आज तेरे दीदार की हसरत फिर दिल ने सजा रखी है,

वक्त मिले तो फिर ख्वाबों में आ जाना

 

ओह कितनी तपिश है लब पे न खोलिये जनाब।

🌹गर्मी से झुलस जाए न ये सुर्ख रू शबाब।।

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